बिहार में शिक्षकों के मोबाइल इस्तेमाल पर सख्ती की तैयारी, कक्षा में जाने से पहले प्रधानाध्यापक क�
Posted on July 31, 2026 by
BiharTalkies
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बिहार में शिक्षकों के मोबाइल इस्तेमाल पर सख्ती की तैयारी, कक्षा में जाने से पहले प्रधानाध्यापक के पास जमा करना होगा फोन! शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के बड़े संकेत
पटना/बांका: बिहार में सरकारी विद्यालयों की शिक्षण व्यवस्था को अधिक प्रभावी और अनुशासित बनाने की दिशा में शिक्षा विभाग एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। राज्य के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने विद्यालयों में कक्षा के दौरान शिक्षकों द्वारा मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर सख्ती के स्पष्ट संकेत दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि शिक्षक विद्यालय पहुंचने के बाद कक्षा में प्रवेश करने से पहले अपना मोबाइल फोन प्रधानाध्यापक के पास जमा करें, ताकि पढ़ाई के दौरान किसी प्रकार का व्यवधान न हो।
बांका समीक्षा बैठक में दिए निर्देश
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बांका परिसदन में आयोजित शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) समेत विभागीय अधिकारियों को इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए शिक्षण कार्य के दौरान अनावश्यक व्यवधानों को समाप्त करना आवश्यक है।
मंत्री ने कहा कि कई बार कक्षा के दौरान मोबाइल फोन पर आने वाली कॉल, संदेश और अन्य गतिविधियां शिक्षकों का ध्यान भंग करती हैं। इसका सीधा असर छात्रों की पढ़ाई और कक्षा के वातावरण पर पड़ता है। ऐसे में यदि शिक्षक कक्षा में मोबाइल लेकर नहीं जाएंगे तो वे पूरी एकाग्रता के साथ विद्यार्थियों को पढ़ा सकेंगे।
फिलहाल नहीं जारी हुआ कोई औपचारिक आदेश
शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि फिलहाल इस संबंध में विभाग की ओर से कोई औपचारिक आदेश जारी नहीं किया गया है। शुरुआती चरण में जिला शिक्षा पदाधिकारी और अन्य अधिकारी शिक्षकों से इस व्यवस्था का स्वेच्छा से पालन करने का आग्रह करेंगे।
उन्होंने कहा कि यदि स्वैच्छिक व्यवस्था से अपेक्षित परिणाम नहीं मिले और शिक्षण व्यवस्था में सुधार नहीं दिखा, तो शिक्षा विभाग औपचारिक आदेश जारी कर इसे लागू करने पर विचार करेगा।
शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर सरकार का फोकस
मंत्री ने समीक्षा बैठक में अधिकारियों को विद्यालयों में नियमित उपस्थिति, समय पर पठन-पाठन, विद्यार्थियों के सीखने के स्तर और शैक्षणिक वातावरण को बेहतर बनाने के लिए लगातार निगरानी रखने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए अनुशासन और जवाबदेही दोनों आवश्यक हैं।
शिक्षकों और विभाग की नजरें संभावित आदेश पर
शिक्षा मंत्री के इस बयान के बाद राज्य भर के शिक्षकों के बीच इस प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है। यदि भविष्य में विभाग औपचारिक आदेश जारी करता है, तो बिहार के सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों के मोबाइल उपयोग को लेकर नई व्यवस्था लागू हो सकती है।
हालांकि विभाग ने अभी इसे अनिवार्य नहीं बनाया है, लेकिन अधिकारियों को दिए गए निर्देश यह संकेत देते हैं कि आने वाले समय में शिक्षण कार्य के दौरान मोबाइल उपयोग को लेकर सख्त नियम लागू किए जा सकते हैं।
क्या होगा संभावित असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस व्यवस्था का प्रभावी ढंग से पालन कराया गया, तो कक्षाओं में शिक्षकों की एकाग्रता बढ़ सकती है और विद्यार्थियों को अधिक गुणवत्तापूर्ण शिक्षण वातावरण मिल सकता है। वहीं दूसरी ओर कुछ शिक्षक संगठनों की ओर से इस प्रस्ताव पर व्यावहारिक पहलुओं और आपातकालीन परिस्थितियों को लेकर भी सवाल उठाए जा सकते हैं।
अब सभी की निगाहें शिक्षा विभाग के अगले कदम पर टिकी हैं कि यह पहल केवल स्वैच्छिक स्तर तक सीमित रहती है या भविष्य में इसे औपचारिक आदेश के माध्यम से पूरे राज्य में लागू किया जाता है।
पटना/बांका: बिहार में सरकारी विद्यालयों की शिक्षण व्यवस्था को अधिक प्रभावी और अनुशासित बनाने की दिशा में शिक्षा विभाग एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। राज्य के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने विद्यालयों में कक्षा के दौरान शिक्षकों द्वारा मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर सख्ती के स्पष्ट संकेत दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि शिक्षक विद्यालय पहुंचने के बाद कक्षा में प्रवेश करने से पहले अपना मोबाइल फोन प्रधानाध्यापक के पास जमा करें, ताकि पढ़ाई के दौरान किसी प्रकार का व्यवधान न हो।
बांका समीक्षा बैठक में दिए निर्देश
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बांका परिसदन में आयोजित शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) समेत विभागीय अधिकारियों को इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए शिक्षण कार्य के दौरान अनावश्यक व्यवधानों को समाप्त करना आवश्यक है।
मंत्री ने कहा कि कई बार कक्षा के दौरान मोबाइल फोन पर आने वाली कॉल, संदेश और अन्य गतिविधियां शिक्षकों का ध्यान भंग करती हैं। इसका सीधा असर छात्रों की पढ़ाई और कक्षा के वातावरण पर पड़ता है। ऐसे में यदि शिक्षक कक्षा में मोबाइल लेकर नहीं जाएंगे तो वे पूरी एकाग्रता के साथ विद्यार्थियों को पढ़ा सकेंगे।
फिलहाल नहीं जारी हुआ कोई औपचारिक आदेश
शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि फिलहाल इस संबंध में विभाग की ओर से कोई औपचारिक आदेश जारी नहीं किया गया है। शुरुआती चरण में जिला शिक्षा पदाधिकारी और अन्य अधिकारी शिक्षकों से इस व्यवस्था का स्वेच्छा से पालन करने का आग्रह करेंगे।
उन्होंने कहा कि यदि स्वैच्छिक व्यवस्था से अपेक्षित परिणाम नहीं मिले और शिक्षण व्यवस्था में सुधार नहीं दिखा, तो शिक्षा विभाग औपचारिक आदेश जारी कर इसे लागू करने पर विचार करेगा।
शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर सरकार का फोकस
मंत्री ने समीक्षा बैठक में अधिकारियों को विद्यालयों में नियमित उपस्थिति, समय पर पठन-पाठन, विद्यार्थियों के सीखने के स्तर और शैक्षणिक वातावरण को बेहतर बनाने के लिए लगातार निगरानी रखने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए अनुशासन और जवाबदेही दोनों आवश्यक हैं।
शिक्षकों और विभाग की नजरें संभावित आदेश पर
शिक्षा मंत्री के इस बयान के बाद राज्य भर के शिक्षकों के बीच इस प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है। यदि भविष्य में विभाग औपचारिक आदेश जारी करता है, तो बिहार के सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों के मोबाइल उपयोग को लेकर नई व्यवस्था लागू हो सकती है।
हालांकि विभाग ने अभी इसे अनिवार्य नहीं बनाया है, लेकिन अधिकारियों को दिए गए निर्देश यह संकेत देते हैं कि आने वाले समय में शिक्षण कार्य के दौरान मोबाइल उपयोग को लेकर सख्त नियम लागू किए जा सकते हैं।
क्या होगा संभावित असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस व्यवस्था का प्रभावी ढंग से पालन कराया गया, तो कक्षाओं में शिक्षकों की एकाग्रता बढ़ सकती है और विद्यार्थियों को अधिक गुणवत्तापूर्ण शिक्षण वातावरण मिल सकता है। वहीं दूसरी ओर कुछ शिक्षक संगठनों की ओर से इस प्रस्ताव पर व्यावहारिक पहलुओं और आपातकालीन परिस्थितियों को लेकर भी सवाल उठाए जा सकते हैं।
अब सभी की निगाहें शिक्षा विभाग के अगले कदम पर टिकी हैं कि यह पहल केवल स्वैच्छिक स्तर तक सीमित रहती है या भविष्य में इसे औपचारिक आदेश के माध्यम से पूरे राज्य में लागू किया जाता है।
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