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मध्यप्रदेश में AI मशीनों के टेंडर पर बड़ा खुलासा: ₹200 करोड़ की मशीनों के लिए ₹1,200 करोड़ किराया देगी सर

Posted on August 08, 2026 by BiharTalkies
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मध्यप्रदेश में AI मशीनों के टेंडर पर बड़ा खुलासा: ₹200 करोड़ की मशीनों के लिए ₹1,200 करोड़ किराया देगी सर
मध्यप्रदेश में AI मशीनों के टेंडर पर बड़ा खुलासा: ₹200 करोड़ की मशीनों के लिए ₹1,200 करोड़ किराया देगी सरकार?

खाद्यान्न की गुणवत्ता जांच के नाम पर टेंडर प्रक्रिया सवालों के घेरे में, दैनिक भास्कर की इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट में सामने आए चौंकाने वाले दावे

भोपाल। मध्यप्रदेश में खाद्यान्न की गुणवत्ता जांच के लिए AI आधारित मशीनों की खरीद और उनके संचालन से जुड़ा एक टेंडर अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है। दैनिक भास्कर की एक इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट में दावा किया गया है कि करीब ₹200 करोड़ मूल्य की मशीनों के लिए सरकार लगभग ₹1,200 करोड़ का किराया चुकाने की तैयारी में है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया में सरकारी धन के इस्तेमाल और टेंडर की शर्तों को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।

₹200 करोड़ की मशीन, ₹1,200 करोड़ का किराया!

रिपोर्ट में सामने आए दावों के अनुसार, खाद्यान्न की गुणवत्ता जांच के लिए इस्तेमाल होने वाली AI मशीनों की अनुमानित कीमत करीब ₹200 करोड़ है। इसके बावजूद मशीनों को किराये पर लेने के लिए प्रस्तावित राशि लगभग ₹1,200 करोड़ बताई जा रही है।

यदि ये आंकड़े सही हैं तो मशीनों की अनुमानित कीमत और प्रस्तावित किराये के बीच का अंतर अपने आप में बड़ा सवाल खड़ा करता है। सवाल यह है कि सरकार के लिए मशीनों को खरीदना अधिक किफायती होता या लंबे समय तक किराये पर लेना?

टेंडर की शर्तों पर भी उठ रहे सवाल

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में टेंडर प्रक्रिया की शर्तों और उसकी संरचना को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोपों और रिपोर्ट में किए गए दावों के मुताबिक, टेंडर की ऐसी शर्तें निर्धारित की गईं जिनसे प्रतिस्पर्धा और पारदर्शिता को लेकर सवाल पैदा होते हैं।

सरकार के सामने कई अहम सवाल

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल प्रस्तावित खर्च का है। अगर मशीनों की कुल कीमत लगभग ₹200 करोड़ है, तो उन्हें किराये पर लेने में लगभग ₹1,200 करोड़ खर्च करने की जरूरत क्यों पड़ रही है?

मामला सिर्फ मशीनों का नहीं, सरकारी धन के इस्तेमाल का है

AI और आधुनिक तकनीक के जरिए खाद्यान्न की गुणवत्ता जांच की व्यवस्था को लेकर किसी को आपत्ति नहीं हो सकती। लेकिन तकनीक के नाम पर होने वाले बड़े सरकारी खर्च में पारदर्शिता, प्रतिस्पर्धी निविदा और वित्तीय जवाबदेही अनिवार्य है।

दैनिक भास्कर की इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट में किए गए दावे यदि दस्तावेजों और टेंडर की वास्तविक शर्तों से पुष्ट होते हैं, तो यह मध्यप्रदेश सरकार की टेंडर प्रक्रिया और सार्वजनिक धन के इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।

अब निगाह सरकार की सफाई पर है। सरकार को सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट करना होगा कि ₹200 करोड़ की अनुमानित मशीनों के लिए ₹1,200 करोड़ के किराये का प्रस्ताव किस आधार पर तैयार किया गया और इससे राज्य के खजाने को वास्तविक लाभ क्या होगा।
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