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नीतीश को इतिहास के पन्नो में एक विशुद्ध अवसरवादी तथा मतलबपरस्त राजनीतिज्ञ के रूप में याद किया जा�

Posted on March 26, 2026 by BiharTalkies
News and Politics
नीतीश को इतिहास के पन्नो में एक विशुद्ध अवसरवादी तथा मतलबपरस्त राजनीतिज्ञ के रूप में याद किया जा�
नीतीश कुमार के शुरूआती दो चुनावों का खर्च उठाया नरेंद्र सिंह ने. तीसरे चुनाव के भामाशाह बने चंद्रशेखर. जिसमें चलने के लिए गाड़ी भेजा ताऊ देवीलाल ने. फर्श से अर्श तक की लठैती से बकैती तक की जिम्मेदारी अपने सिर उठाए रहे विजयकृष्ण और पहुंचा दिए विधानसभा. अब दिल्ली की यात्रा थी जिसमें सहायक बने जगदानंद और लालू यादव. आगे की डगर बिहार सरकार के मुखिया तक जाती है. इसे इन्होंने तय किया जार्ज फर्नांडिस, आनंद मोहन, शिवानंद तिवारी, वशिष्ठ नारायण सिंह, अरुण कुमार, दिग्विजय सिंह, रामजीवन सिंह, ठाकुर हरिकिशोर सिंह, प्रभुनाथ सिंह, अजीत सिंह, केपी सिन्हा जैसे समर्पित साथियों के कंधों पर सवार होकर. पॉवर में आने के बाद इन सभी को अपने षडयंत्रकारी चालों से कैसे और किस निर्ममता से निपटाया, यह सर्वविदित है. इसे प्रकृति का न्याय ही कहेंगे कि जिस शातिर दिमाग से इन्होंने अपने सभी साथियों और प्रतिस्पर्धियों को निपटाया उसी का माइलेज बिगड़ गया. फिर किस्मत के धनी इस राजनैतिक जुआरी को अंततः निपटाया गुजरात के जुआरियों ने. तकरीबन दो दशक के बाद भी स्वयं को कयामत तक बिहार के बादशाह की कुर्सी पर रखने और पुत्र को भाया राज्यसभा पार्टी का मालिक बनाने का सपना क्षत विक्षत हो गया. एक बार मिली सफलता के 21 वर्षों के बाद पहली बार घिरे और विवश कर हटाए गए नीतीश को इतिहास के पन्नो में एक विशुद्ध अवसरवादी तथा मतलबपरस्त राजनीतिज्ञ के रूप में याद किया जाएगा.

बंटी सिंह - सिवान
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