फ्रॉड निकला ब्रह्मेश्वर मुखिया की परिवार. पोती का फर्जी IAS बनने का प्रयास.
फ्रॉड निकला ब्रह्मेश्वर मुखिया की परिवार. पोती का फर्जी IAS बनने का प्रयास. UPSC में 301वीं रैंक पर दावा करने वाली रणवीर सेना संस्थापक ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती ने अपने एडमिट कार्ड में छेड़छाड़ कर पूरे देश के आंख में धूल झोंकने का प्रयास किया. बिहार के भोजपुर की रहनेवाली आकांक्षा सिंह यूपीएससी-2025 का प्रारंभिक परीक्षा भी पास नही कर पाई थी. जबकि रिजल्ट के बाद इसने पूरे परिवार के साथ बैठकर देश के तमाम चैनलों और मीडियावालों को बेहद शातिराना अंदाज में बेबाकी से इंटरव्यू दिया। अपने दादा को अपना आदर्श बताया और यूपीएससी में अपने साक्षात्कार तक की मनगढ़ंत कहानी सुनाई. इस दौरान इस स्क्रिप्टेड कहानी में पूरे परिवार का नाटकीय आत्मविश्वास गजब का था. एडमिट कार्ड में कुटरचना के दौरान यह नटवरलाली परिवार QR कोड के महत्व को नही समझ पाया. आश्चर्यजनक रूप से एक चैनल को दिए गए इंटरव्यू में इस लड़की ने दावा किया कि मोबाइल फॉरमेट होने से उसे UPSC का भेजा हुआ ईमेल डिलीट हो गया जबकि ऐसा मुमकिन नही है. दरअसल जिस रेंक पर इसने अपना दावा किया वो उतर प्रदेश के गाजीपुर जिले के जमनियां प्रखंड अंतर्गत अभईपुर गांव की डॉक्टर आकांक्षा सिंह का है जो पटना एम्स से MBBS और MS है. इनके पिताजी रंजीत सिंह एयरफोर्स में जूनियर वारंट ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं. इन्होंने अपने पब्लिक प्लेटफॉर्म पर अपने सारे कागजात सार्वजनिक किया है. इसके बाद AIR रैंक 494 पर चयनित दूसरी आकांक्षा सिंह के रिजल्ट के बहाने सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाई गई की वो इसकी है मगर वो भी अरवल की निकली. अंत में यूपीएससी को आज प्रेस रिलीज जारी कर स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी. इसमें AIR 301 रैंक पर गाजीपुर की आकांक्षा सिंह को वास्तविक बताया गया.
UPSC में 301वीं रैंक पर दावा करने वाली रणवीर सेना संस्थापक ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती ने अपने एडमिट कार्ड में छेड़छाड़ कर पूरे देश के आंख में धूल झोंकने का प्रयास किया. बिहार के भोजपुर की रहनेवाली आकांक्षा सिंह यूपीएससी-2025 का प्रारंभिक परीक्षा भी पास नही कर पाई थी. जबकि रिजल्ट के बाद इसने पूरे परिवार के साथ बैठकर देश के तमाम चैनलों और मीडियावालों को बेहद शातिराना अंदाज में बेबाकी से इंटरव्यू दिया। अपने दादा को अपना आदर्श बताया और यूपीएससी में अपने साक्षात्कार तक की मनगढ़ंत कहानी सुनाई. इस दौरान इस स्क्रिप्टेड कहानी में पूरे परिवार का नाटकीय आत्मविश्वास गजब का था. एडमिट कार्ड में कुटरचना के दौरान यह नटवरलाली परिवार QR कोड के महत्व को नही समझ पाया. आश्चर्यजनक रूप से एक चैनल को दिए गए इंटरव्यू में इस लड़की ने दावा किया कि मोबाइल फॉरमेट होने से उसे UPSC का भेजा हुआ ईमेल डिलीट हो गया जबकि ऐसा मुमकिन नही है.
दरअसल जिस रेंक पर इसने अपना दावा किया वो उतर प्रदेश के गाजीपुर जिले के जमनियां प्रखंड अंतर्गत अभईपुर गांव की डॉक्टर आकांक्षा सिंह का है जो पटना एम्स से MBBS और MS है. इनके पिताजी रंजीत सिंह एयरफोर्स में जूनियर वारंट ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं. इन्होंने अपने पब्लिक प्लेटफॉर्म पर अपने सारे कागजात सार्वजनिक किया है.
इसके बाद AIR रैंक 494 पर चयनित दूसरी आकांक्षा सिंह के रिजल्ट के बहाने सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाई गई की वो इसकी है मगर वो भी अरवल की निकली. अंत में यूपीएससी को आज प्रेस रिलीज जारी कर स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी. इसमें AIR 301 रैंक पर गाजीपुर की आकांक्षा सिंह को वास्तविक बताया गया.
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